कबीरधाम गैंगरेप कांड : तीन आरोपी गिरफ्तार, पहुंचे सलाखों के पीछे

कवर्धा। कबीरधाम ज़िले को झकझोर देने वाले सामूहिक दुष्कर्म मामले में आखिरकार पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह वही वारदात है, जिसने आदिवासी समाज को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया था और जिसके विरोध में राज्यपाल तक को ज्ञापन सौंपा गया था।
गिरफ्तार आरोपी
- जितेन्द्र खरे उर्फ जित्तु (22), पिता दिलीप खरे, निवासी ऊर्जा पार्क के पास, वार्ड क्रमांक 09, कवर्धा।
- नसीम अहमद उर्फ छोटू (25), पिता नफीस खान, निवासी वार्ड क्रमांक 22, एकता चौक, कवर्धा।
- मोहम्मद सरफराज उर्फ सफ्फु (21), पिता मोहम्मद अयूब, निवासी डालडापारा, आदर्शनगर, कवर्धा।
घटना का सिलसिला
मामला महिला थाना क्षेत्र अंतर्गत महिंद्रा शोरूम के पास का है। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे पीड़िता अपने साथी से विवाद के बाद अकेली निकली थी। इसी दौरान तीनों युवक उसे बहला-फुसलाकर सुनसान इलाके में ले गए और दरिंदगी की।
वारदात के बाद सुबह लगभग 5:15 बजे आरोपियों ने पीड़िता को राजनांदगांव बायपास, घोटिया रोड टी-प्वाइंट के पास स्थित बस स्टॉप पर छोड़ दिया। इसके बाद पीड़िता ने साहस दिखाते हुए पुलिस को घटना की जानकारी दी।
इस पर थाना महिला थाना कवर्धा में अपराध क्रमांक 43/2025, धारा 70(1), 351(3) बीएनएस के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू हुई।
पीड़िता का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 दंप्रसं के तहत दर्ज किया गया।
पुलिस जांच और तकनीकी पहलू
इस सनसनीखेज केस में पुलिस ने जांच की बारीकी बढ़ाई। पुलिस ने जांच का दायरा इतना बढ़ाया कि 150 से 200 संदिग्धों को थानों में लाकर घंटों पूछताछ की गई। सीसीटीवी फुटेज और DVR जब्ती से आरोपियों की हर गतिविधि खंगाली गई। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन ने घटनास्थल पर मौजूदगी और मूवमेंट की पुष्टि कर दी। मुखबिर तंत्र और गुप्त सूचना ने पुलिस को पुख्ता सुराग दिए। वहीं, पीड़िता का बयान और मेडिकल रिपोर्ट इस केस की सबसे मजबूत कड़ी बनी। नतीजा यह हुआ कि लगातार सख्त और बारीक जांच के बाद पुलिस ने आखिरकार तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
विश्लेषण :
“कबीरधाम में हुई यह वारदात न सिर्फ एक जघन्य अपराध है, बल्कि सुरक्षा तंत्र की बड़ी असफलता को भी उजागर करती है। रात के 3 बजे हुई यह दरिंदगी और सुबह 5:15 बजे पीड़िता को बस स्टॉप पर छोड़े जाने का घटनाक्रम यह दर्शाता है कि ऐसे गंभीर मामलों में महिलाओं की सुरक्षा पर क्यों पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। पीड़िता की बहादुरी और साहस सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि अगर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती तो क्या यह घटना होती? प्रशासन, समाज और न्यायपालिका को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा हर समय प्राथमिकता हो और ऐसे अपराधियों को कठोरतम सजा मिले। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वे संवेदनशील मामलों में सतर्क रहें और पीड़िता की गरिमा एवं गोपनीयता का सम्मान करें।”



